हिलवाणी को सहयोग करने के लिए क्लिक करें👇

नैनी झील पर गंभीर संकट! इतिहास में पहली बार सितंबर में न्यूनतम स्तर पर पहुंचा जलस्तर..

serious crisis on naini lake. Hillvani News

serious crisis on naini lake. Hillvani News

मानसून सीजन में औसत से कम वर्षा आगामी दिनों के लिए भी परेशानी खड़ी कर रही है। कम वर्षा के चलते इस मानसून नैनी झील का जलस्तर बेहद कम हो गया है। कम बारिश होने के कारण नैनीताल के प्राकृतिक जलस्रोत भी पूरी तरह रिचार्ज नहीं हो पाए हैं। यही हालत रही तो अगली गर्मियों में जलसंकट से गुजरना पड़ सकता है। इस वर्ष मानसून में महज 565 मिमी ही वर्षा हुई, जो कि मानसून के दौरान बेहद कम है। जिसके बाद नैनीझील और नैनीताल नगर पर गंभीर संकट नजर आने लगा है। इस सीजन में यहां बारिश और नैनीझील का जलस्तर आज तक के इतिहास में सबसे कम है। यह ज्यादा चिंता का विषय इसलिए भी है कि मुख्यतया बारिश से ही नैनीझील में पानी की आपूर्ति होती है। इस साल मानसून समाप्ति पर है जबकि झील का स्तर इस माह के सामान्य जलस्तर से करीब चार फीट कम करीब 7.6 फीट है। अब इसके अधिक बढ़ने के आसार भी नहीं लग रहे।

यह भी पढ़ेंः हाईकोर्ट ने सरकार का आदेश किया निरस्त! DElEd-NIOS अभ्यर्थी दे सकेंगे सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा..

आपको बता दें कि नैनी झील का सर्वाधिक जलस्तर 12 फीट होता है। हर वर्ष यह स्तर नहीं पहुंच पाता लेकिन अगस्त-सितंबर में इसके आसपास पहुंच जाता है। बारिश अधिक होने पर इसके निकासी द्वार खोलकर अतिरिक्त पानी को बाहर निकाल दिया जाता है। ब्रिटिश काल में प्रशासन ने प्रतिदिन बारिश और झील के जलस्तर का रिकॉर्ड रखना शुरू किया था। साथ ही हर महीने के लिए एक आदर्श जलस्तर का निर्धारण भी किया गया था। सिंचाई विभाग ने 1990 से प्रतिदिन जल वर्षा और झील के स्तर के आंकड़े कंप्यूटरीकृत किए हैं। नैनीताल में इस वर्ष सितंबर प्रथम सप्ताह तक करीब एक हजार मिमी वर्षा हुई है जो कि इस अवधि तक आज तक के इतिहास में सबसे कम है। पूर्व के वर्षों में इस अवधि में इससे डेढ़ गुना से लेकर चार गुना तक की वर्षा भी दर्ज की गई है।

यह भी पढ़ेंः चारधाम यात्रा में टूटा 3 साल का रिकॉर्ड, यहां पहुंचे सर्वाधिक श्रद्धालु..

बीते पांच वर्षो में यह रहा झील का जलस्तर व वर्षा
वर्ष- जलस्तर -वर्षा जनवरी से अब तक

2022- 7.6 फीट- 1108 मिमी
2021- 12 फीट- 1773 मि मी
2020- 11.3 फीट- 1567 मिमी
2019- 8.9 फीट- 1325 मिमी
2018- 11.8 फीट- 1865 मिमी
2017- 9.5 फीट- 3084 मिमी

यह भी पढ़ेंः उत्तराखंड में दुखद हादसा! प्राइमरी स्कूल की टॉयलेट की छत गिरी, 8 वर्षीय छात्र की मौत 3 घायल..

इस वर्ष आज से पहले इन दिनों में जल स्तर सबसे न्यूनतम है, जबकि अन्य सभी वर्षों में इस अवधि में जलस्तर लगभग 11 फीट या इससे भी अधिक रहा। इस वर्ष झील का ऐतिहासिक रूप से इतना कम जलस्तर होना इसलिए ज्यादा चिंताजनक है क्योंकि गत वर्ष अक्तूबर में भारी अतिवृष्टि के बाद जलस्तर 12 फीट पहुंच गया था और निकासी गेट खोल कर अतिरिक्त पानी बाहर निकालने के बावजूद लंबे समय तक झील का स्तर बहुत अच्छा बना रहा। जनवरी में भारी बर्फबारी के बाद इस बार मई जून तक भी जलस्तर अन्य वर्षों के मुकाबले बेहतर था। अब झील का स्तर लगभग 7.6 फीट ही होना गंभीर चिंता का विषय है जिसके दुष्परिणाम आगामी महीनों में पेयजल की कमी और झील के और भी निचले स्तर के रूप में सामने आ सकते हैं।

यह भी पढ़ेंः देशद्रोही कहने पर सोशल मीडिया पर छलका जुबिन नौटियाल का दर्द..

सिंचाई विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 14 सितंबर तक नैनीताल में 2010 में 3359 मिमी, 2011 में 4310 मिमी, 2013 में 4074 मिमी, 2014 में 4705 मिमी, 2015 में 4621 मिमी तक वर्षा हो चुकी थी। इनके अलावा जिन वर्षों में सितंबर की समाप्ति तक कम वर्षा हुई उनमें 1997 में एक हजार मिमी से अधिक, 1991 में 14 सितंबर तक 1315 मिमी, 1994 में 1384 मिमी, 1995 में 1649 मिमी, 2005 में 1772 मिमी वर्षा हुई थी। 2019 में 14 सितंबर तक 1325 तब 2020 में 1567 मिमी वर्षा हुई। 14 सितंबर तक अधिकतर वर्षों में 2300 मिमी से ज्यादा और कई बार 4000 मिमी से भी ज्यादा वर्षा दर्ज की गई।

यह भी पढ़ेंः उत्तराखंडः हिमालय क्षेत्र में मिला एक अद्भुत अज्ञात ताल, 6 सदस्यीय ट्रेकिंग दल ने खोजा यह नया ताल..

Rate this post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed

हिलवाणी में आपका स्वागत है |

X