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उत्तराखंड में अगले तीन दिन जमकर बरसेंगे मेघ, अलर्ट जारी

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उत्तराखंड के सभी जिलों में शनिवार से अगले तीन दिन भारी बारिश होने के आसार है। वहीं मौसम विभाग ने 29 जुलाई से एक अगस्त तक पूरे प्रदेश में तेज बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। खासकर चमोली, बागेश्वर और उत्तरकाशी के अधिकतर इलाकों में भारी बारिश होने के आसार हैं। यानी अगस्त की शुरुआत भी भारी बारिश के साथ हो सकती है। मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह ने बताया, तीन दिनों तक प्रदेश भर के कई इलाकों में भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि संवेदनशील इलाकों में भूस्खलन होने से सड़क मार्ग और राजमार्ग अवरुद्ध हो सकते हैं। ऐसे में किसी भी समस्या से बचने के लिए पहाड़ी जिलों की यात्रा करने से पहले मौसम की जानकारी अवश्य लें।

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आपदा से सड़कों व पुलों को अब तक 250 करोड़ की क्षति
उत्तराखंड में निरंतर हो रही वर्षा के कारण सड़कों व पुलों के क्षतिग्रस्त होने से अब तक 250 करोड़ रुपये की क्षति का आकलन किया गया है। वर्षा का क्रम जारी रहने से यह और बढ़ सकती है। यही नहीं, लोनिवि के अंतर्गत आने वाले पुलों के इन दिनों चल रहे सेफ्टी आडिट में अभी तक 86 असुरक्षित श्रेणी में पाए गए हैं। वर्षा के कारण जनजीवन प्रभावित होने के साथ ही सार्वजनिक संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है। राज्य मार्ग, पीएमजीएसवाई की सड़कें, जिला मार्ग व संपर्क मार्गों के साथ ही पुल भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। सचिव लोनिवि डॉ. पंकज कुमार पांडेय के अनुसार सड़कों व पुलों की क्षति आंकलित की जा रही है। अभी तक 250 करोड़ की क्षति का अनुमान है। अभी वर्षाकाल के दो माह शेष हैं। वर्षा का क्रम भी बना हुआ है। इससे क्षति अधिक होने से इन्कार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि वर्तमान में विभाग की प्राथमिकता क्षतिग्रस्त सड़कों को खुलवाकर यातायात को बहाल करने की है।

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डॉ. पांडेय ने राज्य में पुलों के सेफ्टी आडिट के संबंध में पूछे जाने पर बताया कि अभी तक 2250 पुलों का आडिट किया जा चुका है। इनमें 86 पुल असुरक्षित श्रेणी में पाए गए हैं। पौड़ी जिले में सर्वाधिक 18 पुल असुरक्षित पाए गए हैं, जबकि देहरादून व चमोली में यह संख्या क्रमश: 14 व 13 है। उन्होंने बताया कि अभी 1012 पुलों का सेफ्टी आडिट चल रहा है। उन्होंने कहा कि असुरक्षित श्रेणी वाले पुलों की रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है, जिसके आधार पर इनके पुनर्निर्माण अथवा मरम्मत के संबंध में निर्णय लिया जाएगा।

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