Winter snowfall reduced: पहाड़ों की जीवन रेखा है बर्फबारी.. बर्षा-हिमपात का अभाव बड़े खतरे का संकेत, पढ़ें..

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Winter snowfall reduced. Hillvani

Winter snowfall reduced: जब सर्दियों का मौसम आता है और निगाहें पहाड़ों की ओर जाती हैं, तो मन में एक अजीब सा खालीपन महसूस होता है। कभी जिन पहाड़ों पर बर्फ की सफ़ेद चादर महीनों तक जमी रहती थी, आज वहीं नज़ारा बदला-बदला सा दिखता है। सवाल उठता है कि आखिर पहाड़ों में बर्फबारी इतनी कम क्यों हो गई है? यह सिर्फ़ एक मौसम का बदलाव नहीं, बल्कि एक गंभीर चेतावनी भी है। इस बार के ठंड के मौसम में पहाड़ों पर बर्फबारी और बारिश कमी दर्ज की गई है। भारतीय मौसम विभाग यानी IMD के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर और जनवरी में उत्तराखंड में बिल्कुल भी बारिश नहीं हुई है। हिमाचल प्रदेश में 1901 के बाद से दिसंबर में छठवीं बार सबसे कम बारिश हुई। वहीं बात जम्मू-कश्मीर की करें तो यहां बारिश और बर्फबारी दोनों में ही कमी देखी गई है। ऐसे में इस बार की सर्दी में हिमालयी राज्यों की पर्वतीय चोटियां सामान्य रूप से बर्फ रहित और बंजर दिखाई दे रही है। इसी वजह से मौसमी बारिश को लेकर बढ़ती अनिश्चितता, जल सुरक्षा, वन अग्नि की संवेदनशीलता और कृषि उत्पादकता को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।

जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग | Winter snowfall reduced
पहाड़ों पर बर्फबारी कम होने का सबसे प्रमुख कारण वैश्विक स्तर पर हो रहा जलवायु परिवर्तन है, जिसके चलते तापमान लगातार बढ़ रहा है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण सर्दियों के महीनों में भी तापमान पहले जितना कम नहीं हो पा रहा है। बर्फबारी के लिए आवश्यक हिमांक बिंदु (0°C) तक तापमान न पहुंचने के कारण, जहां पहले बर्फ गिरती थी, अब वहां सिर्फ बारिश हो रही है। जो थोड़ी-बहुत बर्फ गिर भी रही है, वह बढ़ते तापमान के कारण जल्दी पिघल जाती है, जिससे स्थायी बर्फ की मात्रा कम हो रही है।
कमजोर पड़ रहे पश्चिमी विक्षोभ | Winter snowfall reduced
पश्चिमी विक्षोभ वे मौसमी घटनाएं हैं जो भूमध्य सागर से नमी लेकर आती हैं और उत्तर भारत के पहाड़ों में बर्फबारी तथा मैदानी इलाकों में बारिश का मुख्य कारण बनती हैं। पिछले कुछ वर्षों में इन पश्चिमी विक्षोभों की तीव्रता और आवृत्ति दोनों में कमी आई है या उनके पैटर्न में बदलाव आया है। ये या तो कमजोर पड़ रहे हैं, या उनका मार्ग बदल रहा है, जिसके चलते पहाड़ों को पर्याप्त नमी और ठंडक नहीं मिल पा रही है।

मानवीय गतिविधियां से बढ़ रहा पर्यावरण का असंतुलन | Winter snowfall reduced
मानव निर्मित गतिविधियां भी इस प्राकृतिक चक्र को बुरी तरह प्रभावित कर रही हैं। पहाड़ों पर बेतहाशा हो रहा शहरीकरण, पर्यटन के लिए निर्माण और प्रदूषण में वृद्धि स्थानीय मौसम के संतुलन को बिगाड़ रही है। कंक्रीट के जंगल और वाहनों का धुआं गर्मी को रोककर रखते हैं। वनों की कटाई से पहाड़ न केवल कमजोर हो रहे हैं, बल्कि पेड़ जो नमी को बनाए रखने में मदद करते हैं, उनकी कमी के कारण ठंडक और बादलों के निर्माण की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है।
जंगलों की कटाई और बढ़ता इंसानी हस्तक्षेप | Winter snowfall reduced
पहाड़ों में सड़कों का तेज़ी से निर्माण, होटल और भवनों की भरमार, पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और बढ़ता पर्यटन प्राकृतिक संतुलन को लगातार नुकसान पहुंचा रहा है। जंगल सिर्फ़ हरियाली नहीं होते, बल्कि वे नमी को बनाए रखने और मौसम को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। जब पेड़ कम हो जाते हैं, तो मिट्टी, पानी और हवा का संतुलन बिगड़ता है। इसका असर सीधे मौसम पर पड़ता है और बर्फबारी का प्राकृतिक चक्र प्रभावित होता है।
बर्फबारी है पहाड़ों की जीवनरेखा | Winter snowfall reduced
बर्फबारी केवल एक सुंदर दृश्य नहीं है, बल्कि यह पहाड़ों की जीवनरेखा है। यही बर्फ पिघलकर नदियों को जन्म देती है, खेती को पानी देती है और करोड़ों लोगों की ज़रूरतें पूरी करती है। अगर बर्फबारी इसी तरह कम होती गई, तो जल संकट और समस्याएँ और गहरी होंगी। आज ज़रूरत है रुककर सोचने की, समझने की और प्रकृति के साथ संतुलन बनाने की। अगर अभी भी हमने जिम्मेदारी नहीं निभाई, तो आने वाली पीढ़ियाँ शायद पहाड़ों को उसी रूप में कभी देख ही न पायें, जैसे हम कभी देखा करते थे।

कम बर्फ गिरने के मुख्य दुष्प्रभाव | Winter snowfall reduced
1- पेयजल और जलसंकट: बर्फ के रूप में जल भंडार न बनने से गर्मियों में नदियों, झरनों और जल स्रोतों का जलस्तर काफी कम हो जाता है, जिससे पीने के पानी की किल्लत हो जाती है।
2- कृषि और बागवानी को नुकसान: बर्फ से जमीन को नमी मिलती है, जिसके अभाव में रबी फसलों (जैसे गेहूं, सरसों) की पैदावार प्रभावित होती है। सेब और अन्य बागवानी फसलों को भी पर्याप्त ठंड न मिलने से नुकसान होता है।
3- ग्लेशियरों का सिकुड़ना: बर्फ की कमी से ग्लेशियरों का संतुलन बिगड़ता है और वे तेजी से पिघलते हैं, जो भविष्य के लिए बड़ा खतरा है।
4- पर्यटन पर नकारात्मक प्रभाव: कम बर्फबारी से विंटर टूरिज्म खत्म हो जाता है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
5- जंगल में आग: बर्फ और बारिश की कमी से नमी कम होने के कारण जंगलों में आग लगने की घटनाएं (दावानल) बढ़ जाती हैं, जो पर्यावरण के लिए खतरा है।
6- पारिस्थितिक असंतुलन: कम बर्फ के कारण वन्यजीवों के लिए भोजन और पानी का संकट खड़ा हो जाता है और उन्हें निचले इलाकों या बस्तियों की तरफ आना पड़ता है।
7- भूस्खलन का खतरा: सूखी जमीन और पेड़ों के कम होने से पहाड़ों का कटाव बढ़ता है और भूस्खलन का खतरा रहता है।
8- बिजली उत्पादन में कमी: नदियों में पानी की कमी से हाइड्रोपॉवर (पनबिजली) परियोजनाएं ठीक से काम नहीं कर पातीं, जिससे ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है।

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