जनगणना 2027 में पूछे जाएंगे ये 33 सवाल, नोटिफिकेशन जारी…

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केंद्र सरकार ने गुरुवार को जनगणना 2027 से जुड़ा नोटिफिकेशन जारी किया। इसमें जनगणना में पूछे जाने वाले 33 सवालों की लिस्ट है, जिसमें मकान, परिवार, वाहन से जुड़े सवाल हैं। जनगणना के दौरान परिवार के मुखिया को ये जानकारियां देनी होंगी। इससे पहले सरकार ने बताया था कि जनगणना दो फेज में होगी। पहला फेज अप्रैल से सितंबर 2026 तक चलेगा। इसमें घरों की लिस्टिंग और घरों का डेटा जुटाया जाएगा। दूसरा फेज फरवरी 2027 से आबादी की गिनती से शुरू होगा।

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कौन से हैं 33 सवाल जो आपसे पूछे जाएंगे?

  • मकान का नंबर, नगर निगम, पंचायत या जनगणना वाला नंबर
  • जनगणना में दिया गया मकान नंबर
  • मकान के फर्श में मुख्य रूप से क्या सामग्री लगी है?
  • मकान की दीवारों में मुख्य रूप से क्या सामग्री है?
  • मकान की छत में मुख्य रूप से क्या सामग्री है?
  • ये मकान किस काम के लिए इस्तेमाल होता है?
  • मकान की हालत कैसी है?
  • परिवार का क्रमांक
  • इस परिवार में कुल कितने लोग आमतौर पर रहते हैं?
  • परिवार के मुखिया, घर के मालिक, प्रमुख व्यक्ति का नाम
  • मुखिया पुरुष हैं या महिला?
  • क्या मुखिया अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) या अन्य वर्ग से हैं?
  • मकान किसका है?
  • परिवार के पास रहने के लिए कुल कितने कमरे हैं?
  • परिवार में कितने विवाहित जोड़े रहते हैं?
  • पीने का पानी मुख्य रूप से कहां से आता है?
  • पानी कितनी आसानी से मिलता है?
  • घर में मुख्य रूप से रोशनी का साधन क्या है?
  • घर में शौचालय है या नहीं?
  • शौचालय किस तरह का है?
  • गंदा पानी कहां जाता है?
  • घर में नहाने की जगह है या नहीं?
  • रसोईघर है? और एलपीजी/पीएनजी गैस कनेक्शन है या नहीं?
  • खाना पकाने के लिए मुख्य ईंधन क्या इस्तेमाल होता है?
  • क्या घर में रेडियो/ट्रांजिस्टर है?
  • क्या टेलीविजन है?
  • क्या इंटरनेट की सुविधा है?
  • क्या लैपटॉप या कंप्यूटर है?
  • क्या टेलीफोन, मोबाइल या स्मार्टफोन है?
  • क्या साइकिल, स्कूटर, मोटरसाइकिल या मोपेड है?
  • क्या कार, जीप या वैन है?
  • परिवार में मुख्य रूप से कौन सा अनाज खाया जाता है?
  • मोबाइल नंबर

पहला फेज 1 अप्रैल 2026 से
केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने 8 जनवरी को बताया था कि देश में होने वाली जनगणना 2027 का पहला फेज 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच किया जाएगा। हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने यहां 30 दिनों में यह काम पूरा करेंगे। सरकार ने यह भी कहा कि घरों की लिस्टिंग शुरू होने से 15 दिन पहले लोगों को खुद से जानकारी भरने (सेल्फ एन्यूमरेशन) का विकल्प भी दिया जाएगा। दरअसल जनगणना 2021 में होनी थी, लेकिन कोरोना महामारी की वजह से इसे टाल दिया गया था, जो अब 2027 में पूरी होगी।
जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी
सरकार ने बताया कि इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी। करीब 30 लाख कर्मचारी मोबाइल एप के जरिए जानकारी जुटाएंगे। मोबाइल एप, पोर्टल और रियल टाइम डेटा ट्रांसफर से जनगणना बहुत हद तक पेपरलेस होगी। ये ऐप Android और iOS दोनों पर काम करेंगे। जाति से जुड़ा डेटा भी डिजिटल तरीके से इकट्ठा किया जाएगा। आजादी के बाद पहली बार जनगणना में जाति की गिनती शामिल होगी। इससे पहले अंग्रेजों के समय 1931 तक जाति आधारित जनगणना हुई थी। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ने अप्रैल में लिया था। 2011 की पिछली जनगणना के अनुसार, भारत की आबादी करीब 121 करोड़ थी, जिसमें लगभग 51.5% पुरुष और 48.5% महिलाएं थीं।

मैप पर हर घर ‘डिजी डॉट’ बनेगा, इसके 5 फायदे होंगे
1- आपदा में सटीक राहत- जियो टैगिंग से बना डिजिटल लेआउट मैप बादल फटने, बाढ़ या भूकंप जैसी आपदा के समय उपयोगी साबित होगा। सुदूर हिमालयी क्षेत्र में बसे किसी गांव में बादल फटने जैसी घटना के समय इस मैप से तुरंत पता चल जाएगा कि किस घर में कितने लोग रहते हैं। होटलों में क्षमता के हिसाब से कितने लोग रहे होंगे। इस ब्योरे से बचाव के लिए जरूरी तमाम नौका, हेलिकॉप्टर, फूड पैकेट आदि की व्यवस्था करने में मदद मिलेगी।
2- परिसीमन में मदद मिलेगी- राजनीतिक सीमाएं जैसे संसदीय या विधानसभा क्षेत्रों का युक्तिसंगत तरीके से निर्धारण करने में भी इससे मदद मिलेगी। जियो टैगिंग से तैयार मैप से यह तस्वीर साफ हो जाएगी कि क्षेत्र में ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र का संतुलित बंटवारा कैसे हो। समुदायों को ऐसे न बांट दिया जाए कि एक मोहल्ला एक क्षेत्र में और दूसरा मोहल्ला किसी अन्य क्षेत्र में शामिल हो जए। घरों के डिजी डॉट से डिलिमिटेशन की प्रक्रिया में आसानी होगी।
3- शहरी प्लानिंग में आसानी- शहरों में सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों या पार्कों की प्लानिंग करने में भी यह मैप उपयोगी साबित होगा। अगर किसी जगह के घरों के डिजिटल लेआउट में बच्चों की अधिकता होगी तो पार्क और स्कूल प्राथमिकता से बनाने की योजना तैयार की जा सकेंगी। यदि किसी बस्ती में कच्चे मकानों या खराब घरों की अधिकता दिखेगी तो वहां किसी मेडिकल इमरजेंसी के समय तत्काल मोबाइल राहत वैन भेजी जा सकेंगी।
4- शहरीकरण और पलायन दर का डेटा मिलेगा- इस जनगणना के दस साल बाद होनी वाली जनगणना में डिजिटल मैप के परिवर्तन आसानी से दर्ज किए जा सकेंगे। देश के विभिन्न हिस्सों में शहरीकरण की दर और पलायन के क्षेत्रों की मैपिंग की तुलना सटीक ढंग से की जा सकेगी।
5- मतदाता सूची से डुप्लीकेट नाम हट जाएंगे- आधार की पहचान के साथ जियो टैगिंग मतदाता सूची को सटीक और मजबूत बनाने में सहायक होगी। जब वोटर किसी भौगोलिक स्थान से डिजिटली जुड़ा होगा तो दोहरे पंजीकरण के समय उसके मूल निवास का पता भी सामने आएगा।

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