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उत्तराखंड अपनी लोककला, लोक संस्कृति और लोक विधाओं के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। कुमाऊं के ऐसे कई लोक गीत हैं जो अब धीरे-धीरे युवा पीढ़ी भूल रही है। पारंपरिक गीत संगीत को छोड़ अब युवा पीढ़ी नए प्रचलन के गीत-संगीत की ओर आकर्षित हो रही है। हल्द्वानी की टीम घुघुती जागर के पारंपरिक लोकगीतों को संजोने का काम कर रही है। इन्हीं गीतों में कुमाऊं के प्रचलित लोकगीत भगनौल, जागर, न्यौली, छपेली गीत सहित अन्य पारंपरिक गीतों को बचाने का काम कर रही है। पहाड़ के लोगों का सुख-दुख हो या फिर भूली बिसरी लोक संस्कृति, टीम घुघुती जागर की आवाज में जब सामने आती है तो हर कोई एक टक सुनने को मजबूर हो जाता है। टीम घुघुती जागर के तीन युवाओं का लोक संस्कृति के प्रति यह जूनुन गांव-पहाड़ से दूर रह रहे प्रवासियों की पसंद बना हुआ है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर राजेंद्र ढैला, राजेंद्र प्रसाद और गिरीश शर्मा की यह संगीतमयी जोड़ी खूब चर्चित हो रही है। घुगुती जागर टीम का यूट्यूब चैनल हो या फिर फेसबुक लाइव, हर मंच पर इन युवाओं के मुरीद मिल जाएंगे। तीनों युवा अपने  गीतों से सोशल मीडिया पर हर रोज छाए रहते हैं। तो आप भी सुने “खट्टी मीठी छुंई” के कार्यक्रम में टीम घुघुती जागर से खास बातचीत…

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