Chamoli Tunnel Landslide: 7 शव बरामद और 3 लापता, टनल के अंदर पहुंचे CM धामी। आठ माह में दूसरा हादसा..
Chamoli Tunnel Landslide
Chamoli Tunnel Landslide: विष्णुगाड़-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की सुरंग में गुरुवार की शाम भारी भूस्खलन हादसे में सात शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि तीन लोग अब भी सुरंग में लापता है। घटना के दूसरे दिन शुक्रवार को तड़के ही राहत-बचाव कार्य शुरू कर दिया गया। मौके पर जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आइटीबीपी व सेना समेत अन्य टीम मौजूद हैं। वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पीपल कोटी पहुंचे और घटना स्थल का जायजा लेने टनल के अंदर पहुंचे। वह जिला अस्पताल में घायलों से मुलाकात भी करेंगे और राहत-बचाव कार्यों की समीक्षा भी करेंगे। सुरंग में ग्रेविटी पर पैकिंग का कार्य चल रहा था। इस दौरान अंदर जोरदार धमाका हुआ और पानी के साथ भारी मलबा सुरंग में भरने लगा। घटना गुरुवार शाम पौने सात बजे के आसपास हुई। इस दौरान 28 श्रमिक सुरंग में काम कर रहे थे। ज्यादातर श्रमिक बिहार, झारखंड व छत्तीसगढ़ के हैं। इनमें से छह श्रमिक हादसे के दौरान राहत-बचाव कार्य में जुट गए थे। जबकि सात लोगों के शव निकल लिए गए। तीन लोग अब भी लापता हैं। और अन्य 12 श्रमिक घायल हुए हैं।
परियोजना में श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े
विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में बृहस्पतिवार रात पानी और मलबा आने से हुए हादसे ने एक बार फिर परियोजना में श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब तीन किलोमीटर लंबी सुरंग में यह पहली दुर्घटना नहीं है। आठ महीने पहले दिसंबर 2025 में भी सुरंग के भीतर दो लोको ट्रॉली आपस में टकरा गई थीं। हादसे में कई मजदूर घायल हुए थे। जलविद्युत परियोजना की क्षमता 444 मेगावाट है और परियोजना का करीब 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। ऐसे में लगातार दूसरी दुर्घटना होना चिंता का विषय है। सुरंग के भीतर काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि परियोजना का संचालन कर रही टीएचडीसी ने मौजूदा घटना को भूगर्भीय आपदा बताया है। परियोजना प्रबंधन का कहना है कि अचानक पानी और मलबा आने की वजह से यह स्थिति बनी। प्रबंधन ने राहत एवं बचाव कार्य में सभी उपलब्ध संसाधनों को लगाया है। इस जवाब से यह सवाल खड़ा होता है कि क्या सुरंग निर्माण के दौरान संभावित भूगर्भीय जोखिमों का पर्याप्त आकलन किया गया, क्या श्रमिकों की सुरक्षा के लिए निर्धारित मानकों का पालन हो रहा और दिसंबर में हुई दुर्घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था में किए गए जरूरी बदलाव लागू किए गए हैं।
