मिसाल: “दृढ़ इच्छाशक्ति से लिखी स्वच्छता की इबारत”, ग्राम प्रधान तनुजा चौहान ने बदली गांव की तस्वीर..

महात्मा गांधी ने कहा था, ‘भारत की आत्मा गांव में बसती है।’ आज भी गांव में सभ्यता व संस्कृति के साथ प्राकृतिक सुंदरता भी विद्यमान है। पंचायती राज व्यवस्था में आज भी कुछ जनप्रतिनिधि गांधीजी के वक्तव्य की मौलिकता को साकार रूप देकर उनके सपनों का गांव बनाने में जुटे हैं। ऐसे ही जनप्रतिनिधियों में शामिल है सीमांत उत्तरकाशी जिले के थाती गांव की प्रधान तनुजा चौहान। दृढ़ इच्छा शक्ति के बूते तनुजा चौहान ने गांव की दशा सुधारने का संकल्प लिया और ग्रामीण विकास योजनाओं को कार्यान्वित करने पर विशेष ध्यान दिया। इससे गांव की तस्वीर ही बदल गई। जिला मुख्यालय उत्तरकाशी से 30 किमी दूर डुंडा ब्लाक के अंतर्गत आने वाला थाती गांव स्वच्छ भारत मिशन के तहत एक मिसाल रूप में जाना जाता है। 400 परिवार और 1200 की आबादी वाले इस गांव में महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक है। यह गांव अनुसूचित जाति बहुल गांव में भी शामिल है। वर्ष 2019 में तनुजा चौहान ने प्रधान निर्वाचित होते ही गांव की तस्वीर बदलनी शुरू की। कोविड काल में गांव लौटे प्रवासियों को रोजगार देने के साथ गांव में विकास कार्य निरंतर जारी रहे।




गंदे पानी की निकासी को बिछाई पीवीसी लाइन
स्वच्छता को लेकर थाती गांव में बेहतर कार्य हुए हैं। पहले यहां हर परिवार के किचन और बाथरूम का पानी सीधे रास्तों में बहता था, जिससे गांव में गंदगी फैल रही थी। वर्षाकाल के दौरान रास्ते कीचड़ से सने रहते थे। इससे आए दिन विवाद की स्थिति हो जाती थी। इसी समस्या के समाधान को प्रधान तनुजा ने ग्रामीणों को अपने घरों में सोख्ता पिट बनाने के लिए प्रेरित किया। साथ ही अनुसूचित जाति बहुल क्षेत्र के घरों के किचन व बाथरूम के गंदे पानी की निकासी के लिए पीवीसी पाइप लाइन बिछाकर गांव के दूर बड़ा सोख्ता गड्ढा बनाया गया। जिन रास्तों पर कीचड़ रहता था, वहां इंटरलाकिंग टाइल्स बिछाई गई। सुरक्षा के लिए रेलिंग और रेलिंग पर सजावटी पौधों के गमले लगवाए गए। वर्षाजल की निकासी के लिए रास्तों के किनारे नाली का निर्माण भी कराया गया। इसके बाद गांव के रास्तों में गंदे पानी और कीचड़ की समस्या से पूरी तरह निजात मिल गई है। गांव में अब सब मेल-मिलाप से रहते हैं।

शुरू करवाया शौचालय का निर्माण
थाती गांव में 12 परिवारों के पास शौचालय न होने के कारण उन्हें खुले में शौच के लिए जाना पड़ता था। इन परिवारों के लिए ग्राम प्रधान ने दो वर्ष पहले गांव के निकट स्वजल परियोजना से सामुदायिक शौचालय बनवाया। शौचालय में पानी और सफाई की व्यवस्था भी की गई। गांव में आने वाले बाहरी व्यक्ति और जिनके पास शौचालय नहीं हैं, वह सर्वजनिक शौचालय का उपयोग करते हैं।

ग्रामीणों को स्वरोजगार से जोड़ा
थाती के ग्रामीणों का खेती-किसानी व पशुपालन मुख्य व्यवसाय है। इसी को देखते हुए प्रधान तनुजा ने मनरेगा में सिंचाई नहर का निर्माण करवाया, ताकि हर खेत तक पर्याप्त पानी पहुंच सके। प्रधान के प्रयास से कृषि विभाग ने 40 परिवारों को नमामि गंगे कृषि कलस्टर से जोड़ा है। इन परिवारों को दवाई, खाद, कृषि यंत्र निशुल्क उपलब्ध करवाए गए। गांव के नौ परिवारों की मनरेगा में गोशाला बनवाई गईं। 12 परिवारों को आजीविका पैकेज के तहत गाय, मुर्गी व बकरी पालन और मशरूम उत्पादन से जोड़ा गया। गांव के निकट कालगढ़ी नदी में मछली के 20 हजार बीज डलवाए गए। जिससे नदी का पारिस्थितिक तंत्र भी सही रहे।

देश के प्रथम सीडीएस का ननिहाल है थाती
देश के प्रथम सीडीएस स्व. जनरल बिपिन रावत का ननिहाल थाती गांव में ही है। सितंबर 2019 में जनरल रावत पत्नी के साथ थाती गांव पहुंचे थे। इससे पहले जनरल रावत 2004 में भी थाती आए थे। ग्राम प्रधान तनुजा ने गांव को जाने वाले रास्ते के प्रवेश स्थान पर जनरल बिपिन रावत स्मृति द्वार का निर्माण शुरू करवाया है।

सतपाल शर्मा, डिप्टी सेक्रेटरी, केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय का कहना है कि इसी वर्ष 27 सितंबर को मैंने राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के नोडल अधिकारी के रूप में थाती गांव का निरीक्षण किया। गांव में गंदे पानी की निकासी के लिए बहुत अच्छे ढंग से कार्य हुए हैं। रास्तों से लेकर गांव में स्वच्छता की स्थिति काफी अच्छी है। गांव में घर हर में पानी उपलब्ध है और वर्षाजल निकासी के लिए भी नालियों का निर्माण हुआ है। इस संबंध में मैंने अपनी रिपोर्ट जल शक्ति मंत्रालय को दे दी है। वहीं तनुजा चौहान, प्रधान थाती, ब्लाक डुंडा उत्तरकाशी का कहना है कि ‘मेरा लक्ष्य है कि सरकार की ओर से विभिन्न योजनाओं के तहत जो भी धनराशि गांव के विकास के लिए मिलती है, उसका सही ढंग से उपयोग हो। साथ ही लीक से हटकर भी कार्य हों, ताकि गांव में हर व्यक्ति को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। इसके लिए ग्रामीणों के सहयोग से मैं निरंतर प्रयासरत हूं।’