उत्तराखंडः ट्रैफ़िक नियम न मानने वाले दें ध्यान.. अब चालान नहीं, होगा सीधे मुकदमा…

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traffic rules. hillvani

उत्तराखंड में सड़क हादसे असमय लोगों को मौत के मुंह में धकेल रहे हैं। शासन प्रशासन के लिए ये एक बड़ी चुनौती बन गया है। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों समेत मैदानी क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाओं का होना आम बात हो गया है। वहीं बात देहरादून करें तो दून में ओवर स्पीड की वजह से 76 फीसदी से अधिक सड़क हादसे हो रहे हैं। हादसे के बाद मौके पर हुए विभागों के निरीक्षण और पुलिस रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। हादसों के हॉट स्पॉट भी जिले के हाईवे क्षेत्र वाले थाने हैं। जिले में शहर की बात करें तो पटेलनगर का आईएसबीटी, शिमला बाईपास रोड इलाका और देहात में डोईवाला और ऋषिकेश क्षेत्र का डेथ जोन बने हैं। वहीं अब शहर की सड़कों पर गलत दिशा में वाहन चलाकर दूसरों की जान जोखिम में डालने वालों की अब खैर नहीं। दून पुलिस ने अब केवल चालान तक सीमित न रहकर गंभीर स्थानों पर ऐसा करने वालों के खिलाफ सीधे मुकदमा दर्ज करना शुरू कर दिया है। एसएसपी देहरादून अजय सिंह ने कहा कि हादसें रोकने को प्रवर्तन की कार्रवाई मजबूत की जा रही है। ब्लैक स्पॉट भी सुधारे जा रहे हैं। गति पर नियंत्रण रखना वाहन चालकों की जिम्मेदारी है। इसे भी सड़क सुरक्षा अभियानों में शामिल किया जा रहा है।

ये बन रहे दुर्घटना के कारण
ओवरस्पीड के बाद गलत साइड से वाहन चलाना सड़क हादसों की दूसरी बड़ी वजह है। अन्य कारणों में नशे में वाहन चलाना, ओवरलोडिंग, मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाना, रेड लाइट जंप करना, गलत तरीके से ओवरटेक शामिल हैं।
डोईवाला-ऋषिकेश सड़क हादसों का हॉट स्पाट
जिले के देहात की बात करें तो साल 2025 में डोईवाला कोतवाली क्षेत्र में 54 सड़क हादसों में 31 और ऋषिकेश क्षेत्र में 39 सड़क हादसों में 24 मौतें हुईं। हालांकि, इन दोनों थानों में 2024 के मुकाबले सुधार हुआ है। फिर भी, जाहिर है कि शहर चारों हॉट स्पाट वाले थाने हाईवे क्षेत्र में पड़ते हैं।
अब चालान नहीं सीधे दर्ज होगा केस
शहर की सड़कों पर गलत दिशा (रांग साइड) में वाहन चलाकर दूसरों की जान जोखिम में डालने वालों की अब खैर नहीं। दून पुलिस ने अब केवल चालान तक सीमित न रहकर गंभीर स्थानों पर ऐसा करने वालों के खिलाफ सीधे मुकदमा दर्ज करना शुरू कर दिया है।

सालभर में 443 सड़क हादसे
देहरादून जिले में साल 2025 में पुलिस रिकार्ड में 443 सड़क हादसे दर्ज किए गए। इन हादसों में 207 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी और 248 लोग घायल हुए। इन 443 हादसों में 339 (76.57 फीसदी) की वजह वाहन की ओवर स्पीड रही। वर्ष 2024 में जिले में 511 हादसे दर्ज किए गए, इनमें 209 लोगों की जान गई और 431 घायल हुए। 511 हादसों में 453 (88.6 फीसदी) हादसे ओवरस्पीड की वजह से हुए। वर्ष 2023 में 481 हादसों में 201 लोग जान गंवा बैठे और 397 घायल हुए। सड़क सुरक्षा के तमाम दावों के बीच पिछले तीन सालों के आंकड़ों की तुलना करें तो हादसों की संख्या में मामूली कमी आई है, लेकिन मौतों का आंकड़ा गंभीर चुनौती बना हुआ है।
शहर में पटेलनगर सबसे खतरनाक
हादसों के लिहाज से जिले में पटेलनगर सबसे संवेदनशील थाना बन गया है। इस थाने के शिमला बाईपास रोड और आईएसबीटी क्षेत्र में लगातार हादसों की संख्या बढ़ रही है। साल 2023 में 39 हादसों में 19, 2024 में 55 हादसों में 18 और 2025 में 63 सड़क हादसों में 22 लोगों की मौत हुई। जिले में कुल हादसों की संख्या जहां घटी है, वहीं इस थाने में बढ़ी है। हादसों में बढ़ोतरी में नेहरू कॉलोनी थाना दूसरे स्थान पर है। यह भी हरिद्वार हाईवे पर है। यहां साल 2025 में 30 हादसों में 17 मौतें हुईं।

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