उत्तराखंड में खूंखार हुआ भालू.. डरा रहे आंकड़े, चौंकाने वाली मानी जा रही वजह..
Bear turns ferocious in Uttarakhand. Hillvani
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाली आबादी हमेशा चुनौतियों से घिरी रहती है। मॉनसून सीजन में बारिश और भूस्खलन अक्सर पर्वतीय क्षेत्र के लोगों को गहरा जख्म देते आ रहे हैं। हालांकि, ये चुनौतियां 3 से 4 महीने मॉनसून के दौरान की ही होती हैं, लेकिन एक बड़ी चुनौती ऐसी भी है जो अब 12 महीने लोगों की जान आफत में डाल रही है। अब आलम ये है कि इन बढ़ती चुनौतियों के कारण लोगों के मन में डर काफी बढ़ गया है, और ये डर है वन्यजीव और मानव के बीच बढ़ते संघर्ष का…. प्रदेशे के पर्वतीय इलाकों में आबादी के बीच अक्सर गुलदार और बाघों की मौजूदगी दर्ज की जाती है। लेकिन अब भालू ने भी अपनी दस्तक से लोगों की दशहत को कई गुना बढ़ा दिया है। प्रदेश के खासकर गढ़वाल क्षेत्र में भालू द्वारा ग्रामीणों पर हमलों की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। दहशत के कारण ग्रामीणों ने शाम होते ही घरों से निकलना बंद कर दिया है।
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गढ़वाल क्षेत्र में बढ़ी हमले की घटनाएं
उत्तराखंड का गढ़वाल रीजन इस वक्त भालुओं के आतंक से भयभीत है। ये विशालकाय जानवर लोगों के ऊपर इस कदर हमला कर रहा है कि या तो लोग अपाहिज हो रहे हैं, या अंग-भंग हो रहे हैं या फिर जान गंवा रहे हैं। अपने शिकार को सूंघने में काफी शातिर ये शिकारी दबे पांव दिन और रात लोगों पर हमला कर रहा है। भालुओं के इन हमलों में इस साल अबतक 6 लोगों की मौत हो चुकी है तो कई लोग गंभीर घायल हुए हैं। हालात ये हैं कि विभाग एक जिले से भालू के आतंक को खत्म करने की रणनीति बनाता है, लेकिन तब तक दूसरा जिला भालू से आतंकित हो रहा होता है। गढ़वाल के पौड़ी, चमोली, टिहरी, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और देहरादून के पर्वतीय क्षेत्र जौनसार में भालू का आतंक लगातार बढ़ता ही जा रहा हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में भालू लगातार ग्रामीणों और मवेशियों पर हमलावार होता जा रहा है।
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क्या है लोगों पर हमले का कारण
उत्तराखंड में भालू के आतंक का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 2000 से लेकर नवंबर 2025 तक भालू के हमले में 71 लोगों की जान गई। जबकि 2000 से अधिक लोगों के ऊपर भालू ने हमला कर गंभीर रूप से घायल किया। जानकारों का कहना है कि भालू इसलिए हमला अधिक कर रहे हैं, क्योंकि हो सकता है उन्हें जंगल में पर्याप्त भोजन न मिल रहा हो। लगातार बारिश, भूस्खलन, बाढ़ की वजह से न केवल पहाड़ों को नुकसान हुआ है, बल्कि वनस्पतियों को भी नुकसान पहुंचा है। भालू अनुमानत: 3000 मीटर की ऊंचाई पर रहते हैं। लेकिन हाल के दिनों में देखा है कि नीचले क्षेत्रों में भी भालू ने लोगों पर हमले किए हैं। ये घटनाएं न केवल पहाड़ों पर रहने वाले लोगों के लिए, बल्कि भालुओं के लिए भी चिंताजनक है। भालू अपने शिकार पर पंजे से प्रहार करता है। अगर भालू अपने शिकार को जिंदा छोड़ भी देता है तो उसके घाव इतने गहरे होते हैं कि उसको भरने में सालों लग जाते हैं।
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